3 दिन के अंदर नपा की बैठक का फैसला करो, नहीं तो ताला लगाकर रामधुन करेंगे
Vidisha News - नगरपालिका परिषद के साधारण सम्मेलन के निलंबन पर निर्णय नहीं होने पर मंगलवार को नगरपालिका अध्यक्ष मुकेश टंडन और...
Jan 08, 2020, 09:56 AM IST
नगरपालिका परिषद के साधारण सम्मेलन के निलंबन पर निर्णय नहीं होने पर मंगलवार को नगरपालिका अध्यक्ष मुकेश टंडन और पार्षदों ने कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह से मुलाकात की। इस दौरान नपाध्यक्ष ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया और सम्मेलन के निलंबन होने की वजह से आने वाली समस्याओं से अवगत कराया। नपाध्यक्ष का कहना है कि बैठक की बहाली नहीं होने की वजह से शहर में कई काम नहीं हो पा रहे हैं।
वहीं ज्ञापन के माध्यम से नपाध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि 9 जनवरी तक बैठक बहाल नहीं होती है तो 10 जनवरी से नपा कार्यालय में ताले लगाएंगे। इतना ही नहीं ताले लगाने के बाद वहां रामधुन शुरू करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस मौके पर नपा के पार्षद भी मौजूद थे। ज्ञापन के मामले में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह का कहना था कि नपाध्यक्ष ने ज्ञापन दिया है। उनके ज्ञापन को हम शासन को भेज रहे हैं। बैठक की बहाली का निर्णय शासन करेगा।
नपाध्यक्ष की कलेक्टर को चेतावनी
कलेक्टर बोले-हम नपाध्यक्ष का ज्ञापन और उनकी समस्या को शासन को भेजेंगे
ये है मामला:1 अक्टूबर को 88 प्रस्ताव पास हुए थे, लेकिन कलेक्टर ने बैठक कर दी निलंबित
नगरपालिका परिषद विदिशा का 1 अक्टूबर 2019 को हुआ साधारण सम्मेलन हुआ था। विधायक और अध्यक्ष के बीच हुए विवाद के बाद सभी प्रस्तावों को कलेक्टर ने निलंबित कर दिया था। सम्मेलन में 88 से ज्यादा प्रस्ताव रखे गए थे। तीन महीने से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी इन प्रस्तावों पर कोई काम शुरू नहीं हो सका क्योंकि शासन ने बैठक बहाल नहीं की।
इन 3 कारणों से बैठक के प्रस्ताव हुए थे निलंबित
1-बैठक की सूचना 7 दिन पहले जारी की गई थी लेकिन पार्षदों को 7 दिन पहले जानकारी नहीं भेजी गई।
2-मीटिंग में प्रस्तुत 88 प्रस्तावों पर सही ढंग से चर्चा नहीं कराई गई।
3-पूर्व मीटिंग के कार्यवृत का निरीक्षण एवं पुष्टि नहीं कराई गई।
नीमताल पर विधायक ने नपाध्यक्ष से मांगा इस्तीफा
विधायक और नपाध्यक्ष के बीच कहासुनी, फिर नपाध्यक्ष ने सौंपा ज्ञापन।
विधायक और नपाध्यक्ष के बीच कहासुनी, फिर नपाध्यक्ष ने सौंपा ज्ञापन।
मंगलवार को नीमताल पर एक आयोजन के दौरान नपाध्यक्ष मुकेश टंडन और विधायक शशांक भार्गव का आमना-सामना हो गया। चर्चा के दौरान विधायक ने कहा कि आप काम नहीं कर पा रहे हैं तो इस्तीफा दे दो। इसके बाद अध्यक्ष का कहना था कि मैं जनता से चुना हुआ हूं। आप बैठक का निर्णय नहीं करा पा रहे हैं इसलिए काम नहीं हो रहे। हमनें सही काम नहीं किए इसलिए विधानसभा चुनाव में हारे। यदि आप भी ऐसा ही करेंगे तो आगे आपके साथ भी ऐसा ही होगा। इसके बाद नपाध्यक्ष पार्षदों के साथ कलेक्टर से मिले और ज्ञापन दे दिया।
विधायक बहाल नहीं करा पा रहे बैठक
नपाध्यक्ष मुकेश टंडन का कहना है कि 1 अक्टूबर को नपा की बैठक को निलंबित कर दिया गया था लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। हम कई बार विधायक से इस बारे में चर्चा कर चुके हैं लेकिन उन्होंने सिर्फ आश्वासन दिया। वे कहते हैं कि जल्दी ही बैठक कराएंगे लेकिन तीन महीने गुजर गए। उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। हम 9 जनवरी तक इंतजार करेंगे। इसके बाद 10 से नपा में ताला लगाएंगे।
जनता काेे ब्लैकमेल कर रहे हैं नपाध्यक्ष
विधायक शशांक भार्गव का कहना है कि पिछले 4 साल में नपा ने एक हजार से ज्यादा प्रस्ताव पास किए। इन प्रस्तावों पर कोई अमल नहीं किया गया। नपाध्यक्ष जनता को इमोशनल ब्लैकमेल कर रहे हैं। वे काम नहीं कर पा रहे हैं तो इस्तीफा दे देना चाहिए। बैठक में नियमों का पालन नहीं किया गया थ इसलिए बैठक निलंबित हुई थी। यदि पुराने कार्यवृत की पुष्टि नहीं कराई गई तो फिर नपाध्यक्ष को दिक्कत आएगी।
नपाध्यक्ष विधायक
बहुमत भाजपा का, फिर भी नपाध्यक्ष परेशान
नपा में 39 में से भाजपा के 26 पार्षद हैं जबकि कांग्रेस के सिर्फ 8 पार्षद हैं। बाकी 5 पार्षद निर्दलीय हैं। इसके बाद भी बैठक को निरस्त हुई अौर इस वजह से अध्यक्ष परेशान हैं।
चार साल में 12 सम्मेलन 1089 प्रस्ताव पास: नपा से मिली जानकारी के अनुसार परिषद का पहला सम्मेलन सितंबर 2015 में हुआ था। तब से लेकर अब तक 12 सम्मेलन हो चुके हैं। इन सम्मेलन में 1089 से ज्यादा प्रस्ताव पास किए गए।
वहीं ज्ञापन के माध्यम से नपाध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि 9 जनवरी तक बैठक बहाल नहीं होती है तो 10 जनवरी से नपा कार्यालय में ताले लगाएंगे। इतना ही नहीं ताले लगाने के बाद वहां रामधुन शुरू करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस मौके पर नपा के पार्षद भी मौजूद थे। ज्ञापन के मामले में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह का कहना था कि नपाध्यक्ष ने ज्ञापन दिया है। उनके ज्ञापन को हम शासन को भेज रहे हैं। बैठक की बहाली का निर्णय शासन करेगा।
नपाध्यक्ष की कलेक्टर को चेतावनी
कलेक्टर बोले-हम नपाध्यक्ष का ज्ञापन और उनकी समस्या को शासन को भेजेंगे
ये है मामला:1 अक्टूबर को 88 प्रस्ताव पास हुए थे, लेकिन कलेक्टर ने बैठक कर दी निलंबित
नगरपालिका परिषद विदिशा का 1 अक्टूबर 2019 को हुआ साधारण सम्मेलन हुआ था। विधायक और अध्यक्ष के बीच हुए विवाद के बाद सभी प्रस्तावों को कलेक्टर ने निलंबित कर दिया था। सम्मेलन में 88 से ज्यादा प्रस्ताव रखे गए थे। तीन महीने से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी इन प्रस्तावों पर कोई काम शुरू नहीं हो सका क्योंकि शासन ने बैठक बहाल नहीं की।
इन 3 कारणों से बैठक के प्रस्ताव हुए थे निलंबित
1-बैठक की सूचना 7 दिन पहले जारी की गई थी लेकिन पार्षदों को 7 दिन पहले जानकारी नहीं भेजी गई।
2-मीटिंग में प्रस्तुत 88 प्रस्तावों पर सही ढंग से चर्चा नहीं कराई गई।
3-पूर्व मीटिंग के कार्यवृत का निरीक्षण एवं पुष्टि नहीं कराई गई।
नीमताल पर विधायक ने नपाध्यक्ष से मांगा इस्तीफा
विधायक और नपाध्यक्ष के बीच कहासुनी, फिर नपाध्यक्ष ने सौंपा ज्ञापन।
विधायक और नपाध्यक्ष के बीच कहासुनी, फिर नपाध्यक्ष ने सौंपा ज्ञापन।
मंगलवार को नीमताल पर एक आयोजन के दौरान नपाध्यक्ष मुकेश टंडन और विधायक शशांक भार्गव का आमना-सामना हो गया। चर्चा के दौरान विधायक ने कहा कि आप काम नहीं कर पा रहे हैं तो इस्तीफा दे दो। इसके बाद अध्यक्ष का कहना था कि मैं जनता से चुना हुआ हूं। आप बैठक का निर्णय नहीं करा पा रहे हैं इसलिए काम नहीं हो रहे। हमनें सही काम नहीं किए इसलिए विधानसभा चुनाव में हारे। यदि आप भी ऐसा ही करेंगे तो आगे आपके साथ भी ऐसा ही होगा। इसके बाद नपाध्यक्ष पार्षदों के साथ कलेक्टर से मिले और ज्ञापन दे दिया।
विधायक बहाल नहीं करा पा रहे बैठक
नपाध्यक्ष मुकेश टंडन का कहना है कि 1 अक्टूबर को नपा की बैठक को निलंबित कर दिया गया था लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। हम कई बार विधायक से इस बारे में चर्चा कर चुके हैं लेकिन उन्होंने सिर्फ आश्वासन दिया। वे कहते हैं कि जल्दी ही बैठक कराएंगे लेकिन तीन महीने गुजर गए। उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। हम 9 जनवरी तक इंतजार करेंगे। इसके बाद 10 से नपा में ताला लगाएंगे।
जनता काेे ब्लैकमेल कर रहे हैं नपाध्यक्ष
विधायक शशांक भार्गव का कहना है कि पिछले 4 साल में नपा ने एक हजार से ज्यादा प्रस्ताव पास किए। इन प्रस्तावों पर कोई अमल नहीं किया गया। नपाध्यक्ष जनता को इमोशनल ब्लैकमेल कर रहे हैं। वे काम नहीं कर पा रहे हैं तो इस्तीफा दे देना चाहिए। बैठक में नियमों का पालन नहीं किया गया थ इसलिए बैठक निलंबित हुई थी। यदि पुराने कार्यवृत की पुष्टि नहीं कराई गई तो फिर नपाध्यक्ष को दिक्कत आएगी।
नपाध्यक्ष विधायक
बहुमत भाजपा का, फिर भी नपाध्यक्ष परेशान
नपा में 39 में से भाजपा के 26 पार्षद हैं जबकि कांग्रेस के सिर्फ 8 पार्षद हैं। बाकी 5 पार्षद निर्दलीय हैं। इसके बाद भी बैठक को निरस्त हुई अौर इस वजह से अध्यक्ष परेशान हैं।
चार साल में 12 सम्मेलन 1089 प्रस्ताव पास: नपा से मिली जानकारी के अनुसार परिषद का पहला सम्मेलन सितंबर 2015 में हुआ था। तब से लेकर अब तक 12 सम्मेलन हो चुके हैं। इन सम्मेलन में 1089 से ज्यादा प्रस्ताव पास किए गए।
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